कोरबा, जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) कोरबा द्वारा जिले के युवाओं को रोजगारपरक कौशल से जोड़ने के लिए अभिनव पहल की जा रही है। जिला कौशल विकास प्राधिकरण के माध्यम से शासकीय प्रशिक्षण केंद्रों में युवाओं को उनकी रुचि और स्थानीय रोजगार की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा रहा है। विशेष रूप से ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों के युवाओं के लिए आवासीय प्रशिक्षण, भोजन तथा प्रशिक्षण उपरांत स्वरोजगार के लिए औजार किट जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं।
आवासीय सुविधा के माध्यम से उन युवाओं को भी प्रशिक्षण से जुड़ने का अवसर मिल रहा है, जिनके लिए प्रतिदिन प्रशिक्षण केंद्र तक आवागमन करना कठिन होता है। डीएमएफ के सहयोग से मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना एवं प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के अंतर्गत विभिन्न व्यवसायों में प्रशिक्षणार्थियों के लिए आवासीय व्यय की स्वीकृति दी गई है। इससे प्रशिक्षण में नियमित उपस्थिति बढ़ाने और प्रशिक्षण बीच में छोड़ने की दर कम करने में मदद मिल रही है।
सौर ऊर्जा के क्षेत्र में स्वरोजगार की राह कोरबा के आजीविका महाविद्यालय में सौर पैनल स्थापना एवं रखरखाव से संबंधित प्रशिक्षण को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस वित्तीय वर्ष में 60 हितग्राहियों के प्रशिक्षण का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें एक समूह के 30 हितग्राहियों का प्रशिक्षण प्रारंभ हो चुका है। प्रशिक्षण अवधि दो माह निर्धारित है। प्रशिक्षण के साथ प्रारंभिक किट तथा प्रशिक्षण उपरांत स्वरोजगार के लिए आवश्यक औजार किट उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है।
इस पहल का उद्देश्य केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रशिक्षित युवाओं को अपने पैरों पर खड़ा करने का अवसर देना है। औजार किट मिलने से युवा स्वयं सौर पैनल स्थापना का कार्य शुरू कर आय अर्जित कर सकेंगे। इससे जिले में सौर ऊर्जा से जुड़ी सेवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित तकनीशियन भी उपलब्ध होंगे।

ड्रोन तकनीक में युवाओं के लिए नए अवसर..
भविष्य की तकनीक और रोजगार की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए आजीविका महाविद्यालय कोरबा में ड्रोन कौशल केंद्र के रूप में विकसित करने की पहल की जा रही है। प्रस्तावित ड्रोन प्रयोगशाला में सर्वेक्षण, भूमि मानचित्रण, कृषि सर्वेक्षण, सौर स्थल निरीक्षण, त्रि-आयामी मॉडल तैयार करने और व्यावसायिक वीडियोग्राफी जैसे क्षेत्रों में व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा सकेगा।कोरबा जैसे खनन, ऊर्जा और कृषि आधारित जिले में ड्रोन तकनीक के बढ़ते उपयोग को देखते हुए यह पहल युवाओं को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के साथ-साथ रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। महिला स्व-सहायता समूहों को भी भविष्य में ‘ड्रोन दीदी’ मॉडल से जोड़ने की संभावना है।
वेल्डिंग और राजमिस्त्री प्रशिक्षण के बाद हाथों में होंगे अपने औजार,

युवाओं को प्रशिक्षण देने के साथ-साथ उन्हें स्वरोजगार शुरू करने के लिए जरूरी संसाधन उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया है। वेल्डर व्यवसाय में 60 हितग्राहियों के प्रशिक्षण का लक्ष्य रखा गया है, जबकि वर्तमान में 30 हितग्राहियों का प्रशिक्षण संचालित है। प्रशिक्षण के बाद वेल्डिंग मशीन, हेलमेट, दस्ताने, एप्रन सहित आवश्यक औजार किट उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। इससे युवा धातु निर्माण, जाली निर्माण, दरवाजा-गेट निर्माण एवं मरम्मत जैसी गतिविधियां शुरू कर सकेंगे।इसी तरह ग्रामीण राजमिस्त्री प्रशिक्षण के लिए भी 60 हितग्राहियों का लक्ष्य रखा गया है। प्रशिक्षण के बाद कन्नी, सतह समतल करने का उपकरण, साहुल, नापने की फीता, हथौड़ा, छैनी, बाल्टी एवं अन्य आवश्यक औजारों से युक्त किट उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। इससे प्रशिक्षित हितग्राही स्वरोजगार अथवा ठेका कार्य शुरू कर सकेंगे और ग्रामीण क्षेत्रों में कुशल राजमिस्त्रियों की उपलब्धता भी बढ़ेगी।

कलेक्टर एवं जिला खनिज संस्थान न्यास के अध्यक्ष कुणाल दुदावत ने बताया कि डीएमएफ कोरबा की यह पहल कौशल प्रशिक्षण को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने की दिशा में एक प्रभावी प्रयास है। प्रशिक्षण, आवासीय सुविधा और औजार किट की व्यवस्था के माध्यम से युवाओं को केवल हुनर ही नहीं, बल्कि अपने हुनर को आय में बदलने के लिए आवश्यक आधार भी उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे स्थानीय स्तर पर कुशल मानव संसाधन तैयार होने के साथ युवाओं के आत्मनिर्भर बनने की संभावनाएं मजबूत होंगी।















