सरस्वती सायकल योजना से सिमगा की 44 बेटियों के सपनों को मिली रफ्तार,दूरस्थ वनांचल की बेटियों के लिए साइकिल बनी शिक्षा की राह आसान करने का माध्यम…..

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कोरबा, शिक्षा के रास्ते में दूरी अब सिमगा की बेटियों के सपनों के आड़े नहीं आएगी। पोड़ीउपरोड़ा विकासखंड के दूरस्थ वनांचल स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सिमगा में सरस्वती सायकल योजना ने 44 बालिकाओं के चेहरे पर मुस्कान के साथ उनके आत्मविश्वास को भी नई उड़ान दी है। सायकल वितरण कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. पवन सिंह ने कक्षा नवमीं में अध्ययनरत 44 बालिकाओं को निःशुल्क सायकल प्रदान की।

सिमगा जैसे दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्र में विद्यालय तक पहुंचना कई छात्राओं के लिए रोज की चुनौती रहा है। पैदल लंबी दूरी तय कर स्कूल पहुंचने में समय और मेहनत दोनों लगते हैं। ऐसे में सरस्वती सायकल योजना इन बेटियों के लिए केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि शिक्षा को निरंतर जारी रखने और अपने सपनों की ओर आगे बढ़ने का मजबूत माध्यम बन रही है।

साइकिल मिली तो चेहरे पर खिल उठी खुशी*

साइकिल वितरण के बाद विद्यालय परिसर का माहौल देखते ही बन रहा था। नई साइकिल पाकर छात्राओं के चेहरे खुशी से खिल उठे। घंटी बजाते हुए जब वे अपनी साइकिल लेकर घर की ओर रवाना हुईं, तो उनके चेहरों पर उत्साह और आत्मविश्वास साफ दिखाई दे रहा था। यह दृश्य इस बात का प्रतीक बना कि शासन की एक छोटी-सी पहल किस तरह बेटियों के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकती है।

मुख्य अतिथि जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. पवन सिंह ने छात्राओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे नियमित रूप से विद्यालय आएं, मन लगाकर पढ़ाई करें और अपने परिवार तथा क्षेत्र का नाम रोशन करें। उन्होंने छात्राओं को शिक्षा के माध्यम से अपने उज्ज्वल भविष्य का निर्माण करने के लिए प्रेरित किया।विद्यालय के प्राचार्य सतीश प्रकाश सिंह ने बताया कि सरस्वती सायकल योजना का उद्देश्य कक्षा नवमीं में प्रवेश लेने वाली बालिकाओं को विद्यालय आने-जाने में सुविधा प्रदान करना और उनकी शिक्षा को प्रोत्साहित करना है। साइकिल मिलने से दूर-दराज से आने वाली छात्राएं अब कम समय में विद्यालय पहुंच सकेंगी। इससे उनकी नियमित उपस्थिति में भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा और पढ़ाई के लिए उन्हें अधिक समय मिल सकेगा।
सरस्वती सायकल योजना की यह पहल सिमगा की बेटियों के लिए सिर्फ साइकिल मिलने की खुशी नहीं, बल्कि शिक्षा के प्रति बढ़ते विश्वास की कहानी है। आज जो 44 बेटियां घंटी बजाते हुए अपने घरों की ओर लौटीं, उनके साथ उनके सपने भी आगे बढ़े। इन साइकिलों के पहिए आने वाले समय में शिक्षा, आत्मनिर्भरता और उज्ज्वल भविष्य की नई राह तय करेंगे।कार्यक्रम में जनपद सदस्य भारत सिंह सिदार, सरपंच मनोहर बिंझवार, उपसरपंच,शाला विकास समिति के अध्यक्ष जय कुमार सिदार एवं सदस्यगण, पालकगण, शिक्षक-शिक्षिकाएं, ग्राम के युवाजन, छात्र-छात्राएं सहित बड़ी संख्या में ग्रामवासी उपस्थित रहे।


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