कोरबा,सेवा संकल्प अभियान के तहत सेवा मेरा योगदान में कोरबा जिले के लोगो की सहभागिता नजर आने लगी है। जिले में शुरू की गई ‘खिलौना दान’ की पहल अब लोगों की भागीदारी से एक संवेदनशील सामाजिक मुहिम का रूप ले रही है। नगर निगम क्षेत्र के विभिन्न वार्डों में पहुंच रहे ‘खिलौना दान रथ’ में परिवार स्वयं आगे बढ़कर अपने घरों में रखे उपयोग योग्य खिलौने दान कर रहे हैं। बच्चों के बड़े हो जाने के बाद घर में रखे रह गए खिलौने अब उन बच्चों तक पहुंचाने की तैयारी है, जिनके लिए एक खिलौना भी चेहरे पर मुस्कान लाने का कारण बन सकता है।

खिलौना दान रथ के माध्यम से पहले ही बड़ी संख्या में खिलौने प्राप्त हो चुके हैं। इनमें छोटे बच्चों के खेलने वाले विभिन्न प्रकार के सुरक्षित एवं उपयोग योग्य खिलौने शामिल हैं। इन खिलौनों को जरूरतमंद बच्चों तक पहुंचाने के साथ ही आंगनबाड़ी केंद्रों में उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि वहां आने वाले बच्चों को खेलने, सीखने और अपनी रचनात्मकता विकसित करने के बेहतर अवसर मिल सकें।
एक घर का रखा हुआ खिलौना, दूसरे घर के बचपन की खुशी
खिलौना दान की यह पहल केवल सामान एकत्र करने तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों के बीच साझा करने, सहयोग और संवेदनशीलता की भावना को मजबूत करने का प्रयास है। कलेक्टर कुणाल दुदावत का कहना है कि कई परिवारों के घरों में ऐसे खिलौने रखे हुए रहते हैं, जिनसे अब उनके बच्चे नहीं खेलते। बच्चे बड़े हो गए हैं या उनके पास नए खिलौने आ गए हैं, इसलिए पुराने खिलौने अलमारी और स्टोर रूम में पड़े रहते हैं। ऐसे में वही खिलौने किसी जरूरतमंद बच्चे के लिए खेल और खुशी का माध्यम बन सकते हैं। जिला प्रशासन एवं महिला एवं बाल विकास विभाग ने परिवारों से अपील की है कि वे घर में रखे साफ-सुथरे, सुरक्षित और उपयोग योग्य खिलौनों को जरूरतमंद बच्चों तक पहुंचाने के लिए दान करें।खिलौना दान रथ के वार्डों में पहुंचने से लोगों में भी उत्साह का वातावरण बन रहा है। रथ के आने की जानकारी मिलते ही कई परिवार अपने घरों से खिलौने निकालकर दान कर रहे हैं। यह पहल इस सोच को मजबूत कर रही है कि खुशियां खरीदने के साथ-साथ बांटी भी जा सकती हैं।
सेवा संकल्प अभियान के तहत नागरिकों को उपयोगी पुस्तकों के दान के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है। बच्चे जब एक कक्षा से दूसरी कक्षा में चले जाते हैं, तो उनकी पिछली कक्षा की पुस्तकें अक्सर घर में रखी रह जाती हैं। यदि वे पुस्तकें उपयोग योग्य हैं, तो उन्हें घर में रखने के बजाय जरूरतमंद बच्चों तक पहुंचाया जा सकता है।

एक बच्चे की पुरानी किताब किसी दूसरे बच्चे के लिए पढ़ाई का नया सहारा बन सकती है। इसी भावना के साथ जिला प्रशासन नागरिकों से आग्रह कर रहा है कि वे अपने घर में ऐसी उपयोगी पुस्तकें और खिलौने, जिनका अब परिवार में उपयोग नहीं हो रहा है, उन्हें जरूरतमंद बच्चों के लिए दान करें।
कलेक्टर श्री कुणाल दुदावत ने जिलेवासियों से अपील की है कि घर में रखे ऐसे खिलौने और पुस्तकें, जिनका अब उनके बच्चों द्वारा उपयोग नहीं किया जा रहा है, उन्हें जरूरतमंद बच्चों तक पहुंचाने में सहयोग करें। आपके घर में रखा एक खिलौना किसी बच्चे के लिए खेल की खुशी बन सकता है और एक किताब उसकी पढ़ाई की नई शुरुआत।खिलौना दान करने अथवा खिलौना संग्रह रथ को अपने घर बुलाने के लिए मोबाइल नंबर 9340509567 पर संपर्क किया जा सकता है।















