कोरबा, यह कहानी है कोरबा के दूरस्थ क्षेत्र में स्थित एक छोटे से गॉव सकदुकला के प्राथमिक शाला में अध्ययनरत कक्षा दूसरी का छात्र लक्ष्मीनारायण की। जिसे खेलते कूदते समय सांस फूलने एवं बार-बार सर्दी जुकाम की समस्या बनी रहती थी, जिसे लेकर उसके माता-पिता बहुत चिन्तित रहा करते थे। एक दिन जब उस स्कूल में स्वास्थ्य परीक्षण के लिये चिरायु टीम पहूँची तब लक्ष्मीनारायण का स्वास्थ्य परीक्षण करते दौरान पता चला कि उसके हृदय गति में असमानता है। हृदय गति में असमानता मिलने के बाद चिरायु टीम द्वारा लक्ष्मीनारायण के माता-पिता को स्कूल बुलाया गया तथा बताया गया कि बच्चे के हृदय गति में असामनता है। जिसे सुनते ही उनके माता-पिता थोड़ी देर के लिए शान्त हो गये और बहुत सारे सवाल पुछने लगे कि अब कैसे करेंगे, ईलाज कैसे करा पायेंगें और हमारे पास इतना पैसा भी नही है। तत्पश्चात चिरायु टीम द्वारा उन्हें बताया गया कि सरकार द्वारा संचालित चिरायु योजना के तहत बच्चों का निःशुल्क इलाज अच्छे अस्पताल में कराया जा सकता है। यह सुन उनकें माता-पिता के जान में जान आई। चिरायु टीम द्वारा आगे कि प्रक्रिया करते हुए बिमारी कि पुष्टि हेतु बच्चें को शिशु रोग विशेषज्ञ के पास जिला अस्पताल सह मेडिकल कॉलेज कोरबा में दिखाया गया। जहां शिशु रोग विशेषज्ञ द्वारा बताया गया कि बच्चें के हृदय में छेद होने कि सम्भावना है जिसे और पुष्टि हेतु इको करने एवं आगे की इलाज के लिए हायर सेंटर रेफर कर दिया गया। तत्पश्चात चिरायु टीम द्वारा वरिष्ठ अधिकारियों के सहयोग से लक्ष्मीनारायण का सफल ऑपरेशन वी.वाय. हॉस्पिटल रायपुर में कराया गया जो कि अब पूर्णतः स्वस्थ्य है। लक्ष्मीनारायण एवं उसके माता-पिता के लिए चिरायु एवं जीवनदायिनी साबित हुई।

















