कोरबा,पहाड़ों और घने जंगलों के बीच बसे वनांचल क्षेत्र में जीवन की अपनी अलग चुनौतियां हैं। सीमित रोजगार के अवसर, संसाधनों का अभाव और अनिश्चित आमदनी ग्रामीण परिवारों के सामने रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने की चुनौती खड़ी करते हैं। ऐसे समय में सरकार की योजनाएं आर्थिक सहारे के साथ लोगों के जीवन में भरोसा और आत्मविश्वास भी पैदा कर रही हैं।
कोरबा जिले के सुदूर वनांचल क्षेत्र बोड़ानाला की रहने वाली राजकुमारी मंझवार के लिए महतारी वंदन योजना ऐसा ही सहारा बनी है। परिवार की सीमित और अनियमित आमदनी के बीच हर माह मिलने वाली एक हजार रुपये की सहायता ने उनकी घरेलू जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अब महतारी वंदन योजना की 31वीं किश्त भी उनके खाते में पहुंच चुकी है, जिससे उन्हें अपने परिवार की आवश्यकताओं को लेकर पहले की अपेक्षा अधिक आर्थिक भरोसा महसूस होता है।राजकुमारी बताती हैं कि गांव में रोजगार के साधन सीमित हैं। परिवार की आमदनी का कोई नियमित स्रोत नहीं था। गांव की खेती की जमीन डुबान में चले जाने से उनके पति रोजी-मजदूरी कर परिवार का खर्च चलाते हैं। आमदनी सीमित होने के कारण कई बार घर की छोटी-बड़ी जरूरतों को पूरा करना भी मुश्किल हो जाता था।ऐसे में अचानक आने वाली छोटी-बड़ी जरूरतें कई बार चिंता बढ़ा देती थीं।वह कहती हैं, “महतारी वंदन की राशि से मुझे बहुत सहारा मिला है। अब घर के जरूरी सामान या रोजमर्रा की किसी आवश्यकता के लिए बार-बार किसी से पैसे मांगने की जरूरत नहीं पड़ती। खाते में राशि आने का भरोसा रहता है और मैं अपनी जरूरत के हिसाब से उसका उपयोग कर लेती हूं।” राजकुमारी के लिए इस योजना का महत्व केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है। नियमित राशि ने उनमें अपने फैसले स्वयं लेने का आत्मविश्वास बढ़ाया है। वह परिवार की जरूरतों में अपनी ओर से योगदान दे पा रही हैं और स्वयं को पहले से अधिक सक्षम महसूस करती हैं।राजकुमारी कहती हैं, “विष्णु भैया की महतारी वंदन योजना हम जैसी महिलाओं के लिए बहुत बड़ी मदद है। इससे हमें अपने छोटे-छोटे खर्चों के लिए दूसरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। महिलाओं को सम्मान और आत्मनिर्भरता का यह अवसर देने के लिए मैं विष्णु भैया को हृदय से धन्यवाद देती हूं।” महतारी वंदन योजना की नियमित सहायता राजकुमारी के जीवन में आर्थिक संबल के साथ आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की नई राह लेकर आई है।















