कोरबा, टी.पी. नगर स्थित विश्व सद्भावना भवन में ब्रह्माकुमारीज़ द्वारा “पर्यावरण संरक्षण एवं आपदा प्रबंधन” विषय पर जनजागरण अभियान का भव्य शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। समारोह में बडी संख्या नागरिकों ने सहभागिता कर पर्यावरण संरक्षण एवं आपदा प्रबंधन के प्रति जागरूक रहने का संकल्प लिया।यह अभियान केवल विश्व सद्भावना भवन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके अंतर्गत कोरबा के विभिन्न औद्योगिक, शैक्षणिक एवं शासकीय संस्थानों में भी व्यापक जनजागरण कार्यक्रम आयोजित किए गए। अभियान के तहत सीएसईबी, एनटीपीसी, कुशमुंडा जीएम कार्यालय, सीएसईबी ट्रेनिंग सेंटर, के.एन. कॉलेज, जिला पंचायत कोरबा, डीएवी पब्लिक स्कूल, साड़ा कन्या विद्यालय तथा गेवरा-दीपका जीएम कॉन्फ्रेंस हॉल सहित शहर के अनेक स्थानों पर पर्यावरण संरक्षण एवं आपदा प्रबंधन विषय पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें अधिकारियों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों एवं नागरिकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता कर पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथियों में एस. के. बंजारा कार्यपालन अभियंता, सीएसईबी डीएसपीएम, रोहित सिंह वैज्ञानिक, पर्यावरण विभाग,योगेश जैन अध्यक्ष, चैंबर ऑफ कामर्स, नितिन चतुर्वेदी पूर्व अध्यक्ष, रोटरी क्लब, बी. के. मोहन सिंघल भाईजी चेयरपर्सन, एसईए विंग, ब्रह्माकुमारीज़, माउंट आबू, पीयूष भाई मोटिवेशनल स्पीकर, दिल्ली, ओंकार भाई माउंट आबू, रुक्मणी दीदी, माधुरी बहन, ज्योति बहन, तारका बहन, एवं श्रीनिवास भाई माउंट आबू प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों का पुष्पगुच्छ एवं तिलक लगाकर आत्मीय स्वागत करने के साथ किया गया। इसके पश्चात बी. के. वीरश ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया। बी.के. बिंदु ने स्वागत उद्बोधन देते हुए सभी अतिथियों एवं उपस्थित जनसमुदाय का अभिनंदन किया तथा कार्यक्रम की भावना से सभी को अवगत कराया। इसके उपरांत बी. के. तारका बहन ने संस्था एवं पर्यावरण संरक्षण जनजागरण अभियान का विस्तृत परिचय प्रस्तुत किया।अपने संबोधन में एस. के. बंजारा ने कहा, “प्रकृति का संतुलन बनाए रखना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है। ऊर्जा संरक्षण एवं पर्यावरण सुरक्षा के लिए सामूहिक प्रयास ही भविष्य को सुरक्षित बना सकते हैं।
रोहित सिंह ने कहा, “पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं से नहीं, बल्कि जनभागीदारी एवं व्यक्तिगत जिम्मेदारी से ही संभव है। प्रत्येक व्यक्ति को वृक्षारोपण और प्रदूषण नियंत्रण में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।”

योगेश जैन ने कहा, “व्यापार जगत को भी पर्यावरण के प्रति अपनी सामाजिक जिम्मेदारी निभानी चाहिए। हर संस्था यदि एक हरित पहल अपनाए, तो बड़ा परिवर्तन संभव है।”नितिन चतुर्वेदी ने कहा, “आपदा प्रबंधन की सही जानकारी और समय पर तैयारी से जन-धन की हानि को काफी हद तक कम किया जा सकता है। जागरूकता ही सबसे बड़ी सुरक्षा है।”बी. के. मोहन सिंघल ने अपने उद्बोधन में कहा कि प्रकृति और मानव का संबंध अत्यंत गहरा एवं आत्मीय है। जब मनुष्य अपने विचार, संस्कार और जीवनशैली में शुद्धता एवं संतुलन लाता है, तब उसका सकारात्मक प्रभाव पूरे वातावरण पर पड़ता है उन्होंने सभी से हरित, स्वच्छ एवं आध्यात्मिक भारत के निर्माण का संकल्प लेने का आह्वान किया।पीयूष भाई ने कहा, “बाहरी पर्यावरण की रक्षा का आधार आंतरिक सकारात्मकता है। जब विचार शुद्ध होंगे, तब व्यवहार और वातावरण दोनों स्वतः सुंदर बनेंगे।”कार्यक्रम के दौरान माधुरी बहन ने उपस्थित सभी को राजयोग मेडिटेशन का अभ्यास कराया, जिससे सभी ने शांति एवं सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव किया।अंत में बी.के. रुक्मणी ने अपने आशीर्वचन में कहा, “पर्यावरण संरक्षण केवल एक अभियान नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी नैतिक जिम्मेदारी है। आध्यात्मिक मूल्यों को अपनाकर हम प्रकृति और मानवता दोनों की सेवा कर सकते हैं।कार्यक्रम के समापन पर श्रीनिवास भाई ने सभी अतिथियों, सहयोगियों एवं उपस्थित नागरिकों के प्रति आभार व्यक्त किया। मंच संचालन बी. के. शेखर राम सिंह ने प्रभावशाली ढंग से किया।
समापन अवसर पर सभी अतिथियों को पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए पौधा, ईश्वरीय सौगात एवं साहित्य भेंट किया गया। कार्यक्रम सौहार्दपूर्ण एवं प्रेरणादायी वातावरण में संपन्न हुआ।





